भारत की हेयर स्टाइलिंग इंडस्ट्री के एक स्तम्भ, हबीब अहमद का 25 सितंबर को मुंबई में निधन हो गया। 84 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कहने वाले हबीब अहमद न केवल एक हेयर स्टाइलिस्ट थे, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक थे, जिन्होंने साधारण से नाई के पेशे को एक सम्मानित कला का दर्जा दिलाया। उनके निधन की सूचना उनके बेटे और मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर साझा की, जिसके बाद पूरे उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई।
हबीब अहमद का नाम देश की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों के हेयरस्टाइल से जुड़ा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के विशिष्ट लुक को आकार दिया, जिसकी पहचान उनके काले-सफ़ेद बालों की आकर्षक शैली थी। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के चांदी जैसे बालों को भी स्टाइल किया, जो उनकी सादगी और व्यक्तित्व का अभिन्न अंग बन गया था।
एक समृद्ध विरासत के उत्तराधिकारी
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2 अक्टूबर, 1940 को मुज़फ़्फ़रनगर के पास जलालाबाद में जन्मे हबीब अहमद को यह कला विरासत में मिली थी। उनके पिता, नज़ीर अहमद, ब्रिटिश भारत के वायसराय के निजी हेयर स्टाइलिस्ट रहे थे और बाद में स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर अन्य राष्ट्रपतियों के भी निजी स्टाइलिस्ट बने। इस पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हबीब अहमद ने लंदन के प्रतिष्ठित मॉरिस स्कूल से हेयर स्टाइलिंग की विशेष ट्रेनिंग ली।
लंदन से लौटने के बाद, उन्होंने दिल्ली के ओबेरॉय समूह के साथ काम करते हुए अपने हुनर को निखारा। वर्ष 1983 में उन्होंने लोदी होटल में “हबीब्स हेयर एंड ब्यूटी सैलून” की शुरुआत की, जिसने भारतीय हेयर स्टाइलिंग को एक नया आयाम दिया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक सैलून और हेयर अकादमियों की श्रृंखला स्थापित की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि हेयर स्टाइलिंग भी एक गंभीर और पेशेवर करियर हो सकता है।
विरासत को आगे बढ़ा रहे बेटे
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हबीब अहमद ने एक ऐसी विरासत छोड़ी है, जिसे उनके बेटे—जावेद हबीब, परवेज़ हबीब और अमजद हबीब—सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं। जावेद हबीब हेयर एंड ब्यूटी लिमिटेड के मालिक जावेद हबीब आज देश भर में एक जाना-माना ब्रांड हैं। पिता के निधन पर जावेद हबीब ने इंस्टाग्राम पर भावनात्मक श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह भारतीय हेयर स्टाइलिंग के एक युग का अंत है।
हबीब अहमद के योगदान ने न केवल उद्योग को आकार दिया, बल्कि अनगिनत स्टाइलिस्टों की पीढ़ियों को भी प्रेरित किया कि वे अपने काम को केवल ‘नाई’ के रूप में नहीं, बल्कि एक पेशेवर कलाकार के रूप में देखें। हबीब अहमद के निधन से भारत ने एक ऐसा विशेषज्ञ खो दिया है, जिसने अपने काम से देश के कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के सार्वजनिक रूप को परिभाषित किया था। उनकी कला और विरासत आने वाले वर्षों तक भारतीय सौंदर्य उद्योग में मार्गदर्शक बनी रहेगी।
