Explainer! ढलान, इंसानी गलती या खराब ड्रेनेज सिस्टम…आखिर क्यों हर साल ‘डूब’ जाता है गुरुग्राम?

5 Min Read

हर साल की तरह इस साल भी गुरुग्राम मानसून की बारिश में डूब गया है। सोमवार दोपहर से हो रही बारिश के कारण गुरुग्राम की सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं। वाहन धीमी गति से चल रहे हैं। कई इलाकों में भारी जाम लग गया है। हर साल 30 लाख लोग इस समस्या से परेशान होते हैं। गुरुग्राम में हर साल ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे ड्रेनेज सिस्टम के अलावा कई कारण बताए जा रहे हैं।

गुरुग्राम में सोमवार को हुई भारी बारिश के कारण कई हाईवे और अंदरूनी सड़कों पर 10 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सड़कों पर जलभराव के कारण कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। लोग घंटों जाम में फंसे रहे। जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसके अलावा, भारी बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए और घरों में पानी घुस गया। आखिर क्या वजह है कि गुरुग्राम हर साल बारिश के पानी में डूब जाता है? सरकार हर साल कहती है कि इस मानसून में कहीं भी जलभराव नहीं होगा, लेकिन बारिश उनकी पोल खोल देती है।

गुरुग्राम में हर साल बाढ़ क्यों आती है?

बताया जाता है कि जुलाई 2016 में गुरुग्राम में भीषण जाम लग गया था। दरअसल, लोग शाम को अपने दफ्तरों से घर जाने के लिए निकले थे, लेकिन आधी रात तक घर नहीं पहुँच पाए। सैकड़ों लोग जाम में फँस गए थे। इसके बाद सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए जल निकासी और सीवरेज व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए। इसके अलावा, शहर में कई जगहों पर अंडरपास और फ्लाईओवर भी बनाए गए। इसके बाद भी, गुरुग्राम हर मानसून की बारिश में जलमग्न हो जाता है।

13 साल बाद भी जल निकासी व्यवस्था का काम अधूरा

एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि गुरुग्राम में 26 किलोमीटर लंबे नाले का निर्माण 2010 में शुरू हुआ था। उस समय इस पर 294 करोड़ रुपये खर्च होने थे। कुछ समय बाद इसका बजट बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसका काम आज तक पूरा नहीं हुआ है। 13 साल बाद भी 3 किलोमीटर लंबे नाले का काम अभी भी अधूरा है।

गुरुग्राम अरावली पहाड़ियों से घिरा हुआ है

दरअसल, गुरुग्राम अरावली पहाड़ियों से घिरा हुआ है। कहा जाता है कि बारिश के दौरान इन पहाड़ियों से पानी शहर में पहुँचता है। जिससे शहर का सीवेज सिस्टम जाम हो जाता है। दरअसल, शहर में इस्तेमाल होने वाला पानी भी नालों में गिरता है। मानसून के दौरान, नालों में गिरने वाले पानी की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। सीवर सिस्टम पानी के दबाव को झेल नहीं पाता और सड़कों पर आ जाता है। इस वजह से गुरुग्राम हर साल बारिश के पानी में डूब जाता है।

ब्रिटिश काल में गुरुग्राम नहीं डूबा

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटिश काल में गुरुग्राम में पुराने घाट, झीलें, तालाब, पुराने जल निकासी नाले और कई छोटे-बड़े बाँध बनाए गए थे। उस समय पहाड़ों से आने वाला बारिश का पानी इन्हीं जगहों पर इकट्ठा होता था। धीरे-धीरे शहरीकरण के कारण गुरुग्राम का पूरा ढाँचा बदल गया।

तालाब, झीलें और सभी जल निकासी प्रणालियाँ गायब हो गई हैं

शहरीकरण के कारण, सभी तालाब, झीलें और सभी जल निकासी प्रणालियाँ गायब हो गई हैं। अब बारिश के दौरान यह पानी बाहर नहीं निकल पाता और शहर के विभिन्न स्थानों पर जमा हो जाता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। इसके अलावा, निजी डेवलपर्स ने भी शहर की भौगोलिक स्थिति जाने बिना कई सोसाइटियाँ बना ली हैं, जिससे बारिश के दौरान शहर में बाढ़ आ जाती है।

Share This Article