डूंगरपुर जिले की बलवाड़ा ग्राम पंचायत में सरपंच द्वारा सार्वजनिक शौचालय के नाम पर घोटाला करने का मामला सामने आया है। वर्ष 2019-2020 में ग्राम पंचायत को सार्वजनिक शौचालय की स्वीकृति मिली। नियमानुसार इसका निर्माण पंचायत की कोरम बैठक में प्रस्ताव पारित कर किया जाना चाहिए था, लेकिन सरपंच नानूराम बरंडा ने न तो कोरम में कोई प्रस्ताव लिया और न ही पंचायत क्षेत्र में कोई सार्वजनिक शौचालय बनवाया। इसके विपरीत, उन्होंने अपने घर के आंगन में ही शौचालय बनवा लिया।
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एक शौचालय के निर्माण की लागत 3 लाख रुपये है।
इसकी कीमत करीब 3 लाख रुपए बताई जा रही है। इस तथाकथित सार्वजनिक शौचालय पर किसी प्रकार का संकेतक बोर्ड भी नहीं लगा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह सार्वजनिक है। इतना ही नहीं, सरपंच के घर के आसपास कोई अन्य आवास भी नहीं है, जबकि नियमानुसार सार्वजनिक शौचालय ऐसी जगह बनाया जाना चाहिए, जहां कम से कम 10 घर हों और जमीन सरकारी हो। इसके बावजूद ग्राम विकास अधिकारी ने मिलीभगत कर इस निर्माण का भुगतान भी कर दिया।
शौचालयों को सार्वजनिक सुविधा के रूप में स्वीकृत किया गया।
भूमि एवं निर्माण से संबंधित अनियमितताएं स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। जियो टैगिंग में केवल सरपंच का घर ही दिखाई दे रहा है, जिससे स्पष्ट है कि यह निर्माण कार्य पंचायत की किसी सार्वजनिक आवश्यकता के लिए नहीं किया गया था। वर्तमान में इस शौचालय का उपयोग केवल सरपंच और उसके परिवार द्वारा ही किया जाता है, हालांकि इसे सार्वजनिक सुविधा के रूप में स्वीकृत किया गया था। इस तरह सरकारी धन का दुरुपयोग कर निजी लाभ प्राप्त किया गया है।
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सरपंच ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर सरपंच नानूराम बरंडा का कहना है कि बलवाड़ा गांव बिखरी हुई बस्ती है और यहां मुस्लिम समुदाय की एक ही मुख्य बस्ती है, जहां लोगों ने शौचालय बनाने से मना कर दिया। इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर पंचायत को जमीन दान कर दी और वहां शौचालय बनवा दिया। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही जमीन दान में दी गई हो, लेकिन घर के आंगन में शौचालय बनाना नियमों के मुताबिक अवैध है। पंचायत समिति के विकास अधिकारी ने कहा है कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
