नीरज कुमार का विपक्ष पर तंज, चुनाव आयोग आपसे पूछकर नहीं करेगा चुनाव की घोषणा

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नीरज कुमार का विपक्ष पर तंज, चुनाव आयोग आपसे पूछकर नहीं करेगा चुनाव की घोषणा

पटना, 16 मार्च (आईएएनएस)। जदयू नेता नीरज कुमार ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावों की घोषणा करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है, वह इसमें कोई राजनीतिक दल दखल न दे।

चुनाव आयोग ने रविवार को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी। कांग्रेस केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान और 4 मई को परिणाम के बीच कई दिनों के गैप पर सवाल खड़े कर रही है

पटना में आईएएनएस से बातचीत में जदयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग का अधिकार क्षेत्र है कि वे चुनावों की तारीखों का ऐलान करे। अब राजनीतिक दल से पूछकर तो चुनाव की घोषणा नहीं की जाएगी। विपक्षी दल चुनाव आयोग को न बताए कि उनका क्या काम है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दल अभी तक बिहार में जो हार का इंजेक्शन मिला था, जिसका असर अब तक गहरा दिखाई पड़ रहा है। एक बार फिर वे विधानसभा चुनाव में हार से पहले माहौल बनाने लगे हैं।

राज्यसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव भले की कितनी भी कोशिश कर लें, एनडीए पांच सीट पर जीत सुनिश्चित करेगी।

जदयू नेता नीरज कुमार ने चुनाव आचार संहिता लागू होते ही निर्वाचन आयोग द्वारा बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव को पद से हटाने पर कहा कि प्रशासन पर राजनीतिकरण का लगातार आरोप लगता रहा है।

प्रशासनिक दायित्व में राजनीतिक हस्तक्षेप कहीं से उचित नहीं है। चुनाव आयोग का अधिकार क्षेत्र है। बिहार में चुनाव था, पटना में कोई घटना घटी तो अधिकारी पर कार्रवाई हुई है। बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को देख रहा हूं कि वे उपलब्धि की चर्चा नहीं करती हैं, बल्कि एसआईआर और दूसरे मुद्दे पर बात करती हैं। जनता अब टीएमसी से तंग आ चुकी है।

जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि जिन राज्यों में एनडीए सत्ता में है, वहां भी चुनाव आयोग ऐसे फैसले ले सकता है। अगर भारत के चुनाव आयोग को लगता है कि चुनावों के निष्पक्ष संचालन के लिए प्रशासनिक फेरबदल जरूरी है, तो उसके पास ऐसे निर्देश जारी करने का अधिकार है।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग पर जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि भारतीय राजनीति में कांशीराम का कद बड़ा है। राहुल गांधी की मांग गलत भी नहीं है, लेकिन, यह फैसला भारत सरकार लेती है।

–आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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