मुंबई, 13 मार्च (आईएएनएस)। ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच देश के कई हिस्सों में गैस व ईंधन संकट को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में कंट्रोल रूम स्थापित करने और जिला स्तर पर विशेष समितियां गठित करने का फैसला किया है, ताकि घरेलू व व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल डिग्गीकर ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि राज्यभर में एलपीजी वितरण की लगातार निगरानी की जाए और आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। सरकार ने साफ कहा है कि राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता पिछले छह महीनों के मुकाबले अधिक है। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि गैस की सप्लाई किसी भी स्थिति में बाधित न होने दी जाए।
गैस सप्लाई में संभावित व्यवधान को रोकने और किसी भी आपात स्थिति में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों में जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी और सभी सरकारी गैस कंपनियों के अधिकारी शामिल होंगे।
इन समितियों की मुख्य जिम्मेदारियों में एलपीजी सप्लाई चेन की निगरानी, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और रोजाना स्थिति की रिपोर्ट सरकार को भेजना शामिल होगा। मुंबई-ठाणे राशनिंग क्षेत्र में एक अलग समिति बनाई जाएगी, जो राशनिंग कंट्रोलर के नेतृत्व में काम करेगी। इस समिति में पुलिस के डिप्टी कमिश्नर और डिप्टी कंट्रोलर (राशनिंग) शामिल होंगे। मुंबई और ठाणे के सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ समन्वय का काम जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (प्रशासन) करेंगे।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जरूरत पड़ने पर कोयला या केरोसिन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जाए। हालांकि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी नियमों का पूरी तरह पालन हो।
जिला स्तर की समितियां होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशनों के साथ बैठकें भी करेंगी, ताकि जहां संभव हो वहां वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, सरकारी छात्रावासों, सरकारी स्कूल और कॉलेजों की मेस, मिड-डे मील योजना और सरकार संचालित आश्रम स्कूलों जैसी जरूरी सेवाएं देने वाले संस्थानों को एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। ऐसे संस्थानों की सूची तैयार की जाएगी और उनके लिए अलग प्राथमिकता आदेश लागू किया जाएगा ताकि इन सेवाओं में किसी तरह की बाधा न आए।
गैस सप्लाई को लेकर किसी भी तरह की अफवाह या घबराहट फैलने से रोकने के लिए सरकार ने सूचना प्रसार की विशेष व्यवस्था भी की है। रेडियो, एफएम चैनल, टेलीविजन और प्रिंट मीडिया के जरिए रोजाना सही जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।
इस काम की जिम्मेदारी सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय और जिला समितियों को दी गई है। साथ ही, सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी या भ्रामक खबरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
तेल कंपनियों को गैस बुकिंग ऐप और मिस्ड कॉल सेवाओं में आने वाली तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य, संभाग, जिला और तालुका स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए व्हाट्सऐप सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि लोग आसानी से अपनी समस्या दर्ज करा सकें।
आने वाले त्योहारों को देखते हुए सार्वजनिक संस्थानों को एलपीजी की आपूर्ति को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम पंचायत सदस्यों से भी सहयोग लिया जाएगा, ताकि गैस सप्लाई को लेकर नागरिकों में किसी तरह की घबराहट न फैले। एलपीजी सिलेंडर लेकर जाने वाले वाहनों और गैस एजेंसियों को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को सौंपी गई है। जिला प्रशासन, राशनिंग कंट्रोलर और तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना गैस स्टॉक की स्थिति और आपूर्ति से संबंधित अपडेट राज्य स्तर के कंट्रोल रूम को भेजें।
महाराष्ट्र में एलपीजी की औसत दैनिक मांग लगभग 9,000 मीट्रिक टन है। इस मांग को पूरा करने के लिए पिछले दो दिनों में रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन को 9,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर लगभग 11,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है। सरकार ने साफ कहा है कि राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन व स्टॉक उपलब्ध है।
व्यावसायिक एलपीजी के मामले में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर आवंटन किया जा रहा है। अस्पतालों, स्कूलों की मिड-डे मील योजना, आश्रम स्कूलों, सामुदायिक रसोई और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की मेस को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके अलावा घरेलू उपयोग के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। राज्य में पेट्रोल और डीजल की भी पर्याप्त उपलब्धता है। महाराष्ट्र की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और बाजार की मांग को पूरा करने के लिए प्रतिदिन लगभग 15,000 किलोलीटर पेट्रोल और 38,000 किलोलीटर डीजल का उत्पादन कर रही हैं।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे ईंधन की आपूर्ति को लेकर घबराएं नहीं और किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें क्योंकि राज्य में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तरह से सुनिश्चित की गई हैं।
–आईएएनएस
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