शनि दोष के प्रभाव को दूर करने और साढ़ेसाती व ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए नवरात्रि अत्यंत शुभ समय है। इस वर्ष नवरात्रि तिथियां 22 सितंबर, 2025 से प्रारंभ हो रही हैं। ऐसे में शनिवार के दिन कुछ विशेष उपाय करने से शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। नवरात्रि के दौरान पूजा करने से शनिदेव के कठोर प्रभाव कम हो सकते हैं। आइए जानें शनिदेव के कठोर प्रभाव को कम करने के लिए नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले उपाय।
माँ कालरात्रि की पूजा
नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा करते समय, मन को शांत रखें और भक्ति भाव से उनकी आराधना करें। माँ कालरात्रि शनिदेव को नियंत्रित करती हैं, जिससे शनिदेव का प्रभाव कम होता है।
दुर्गा सप्तशती का पाठ
नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शनि दोष दूर होता है और साढ़ेसाती व ढैय्या का प्रभाव कम होता है। माँ कालरात्रि की पूजा के बाद शनिदेव के मंत्र का जाप करें। मंत्र है “ॐ शं शनैश्चराय नमः।” इस उपाय को करने से आपको खुद ही फर्क महसूस होगा।
हनुमान जी की पूजा और व्रत
नवरात्रि के दौरान हनुमान जी की विशेष पूजा करें। शांत मन से हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी के व्रत का संकल्प लें। इससे शनिदेव के दुष्प्रभाव कम होंगे और कष्ट दूर होंगे।
शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या दूर करने के कुछ अन्य उपाय
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें। तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
शनिवार के दिन ज़रूरतमंदों को तेल दान करें।
शनिवार के दिन हनुमान जी के मंदिर जाएँ और वहाँ बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
शनिवार के दिन नहाने के पानी में काले तिल डालकर स्नान करें। शनि ग्रह की क्रूरता शांत होगी।
