दुनिया के सबसे ख़तरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन का नाम लेकर इज़राइल ने पाकिस्तान की कमज़ोर नस को ज़ोरदार तरीक़े से दबाया है। संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल द्वारा लादेन का ज़िक्र किए जाने के बाद से पाकिस्तान भड़क गया है। अब पाकिस्तान ने इज़राइल पर अपना गुस्सा निकालते हुए कहा है कि पाकिस्तान किसी भी बाहरी ख़तरे से अपनी रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने मध्य पूर्व में शांति के लिए इज़राइल की प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाए हैं।
पाकिस्तान और इज़राइल के बीच यह ताज़ा विवाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से शुरू हुआ है। UNSC में पाकिस्तान और इज़राइल के प्रतिनिधियों के बीच तीखी तकरार देखने को मिली। मामला तब और बढ़ गया जब इज़राइल ने कतर की राजधानी दोहा में अपने हमले का बचाव किया और अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पाकिस्तान में हुए अमेरिकी हमले का उदाहरण दिया, जिसमें ओसामा बिन लादेन मारा गया था। जैसे ही इज़राइली दूत ने लादेन का नाम लिया, पाकिस्तान चिढ़ गया।
लादेन के नाम से चिढ़ गया पाकिस्तान
आपको बता दें कि पाकिस्तान इज़राइल को मान्यता नहीं देता है। पाकिस्तान और इज़राइल के बीच कभी भी अच्छे संबंध नहीं रहे हैं। पाकिस्तान फ़िलिस्तीन राज्य की वकालत करता है। पाकिस्तान ने दोहा पर हमले के लिए इज़राइल की निंदा की है, लेकिन ओसामा बिन लादेन पर इज़राइल के बयान को ‘भ्रामक’ और ‘गलत तुलना’ करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इज़राइल स्वयं एक “कब्ज़ा करने वाला, आक्रामक और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाला” है। पाकिस्तान ने कहा कि “उसका आतंकवाद-विरोधी रुख और बलिदान पूरी दुनिया के सामने दर्ज हैं और अल-क़ायदा का सफाया पाकिस्तान के प्रयासों से ही संभव हो पाया।” दोनों देशों के बीच यह बहस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व की स्थिति पर दक्षिण कोरिया की अध्यक्षता में पाकिस्तान, अल्जीरिया और सोमालिया द्वारा आयोजित एक बहस के दौरान हुई।
इसके अलावा, पाकिस्तान ने यह सवाल भी उठाया कि क्या हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई इज़राइल के लिए प्राथमिकता है? राजदूत अहमद ने परिषद को बताया, “यह स्पष्ट है कि इज़राइल, जो एक कब्ज़ा करने वाली शक्ति है, शांति की हर संभावना को कमज़ोर और नष्ट करने की हर संभव कोशिश करने पर तुला हुआ है।” जबकि इज़राइली राजदूत डैनी डैनन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवादियों के लिए न तो गाजा में, न तेहरान में और न ही दोहा में कोई सुरक्षित पनाहगाह है। उन्होंने चेतावनी दी, “आतंकवादियों को कोई छूट नहीं है। इतिहास आतंकवादियों के सहयोगियों के प्रति दयालु नहीं होगा। या तो कतर हमास की निंदा करे, हमास को खदेड़े और हमास को न्याय के कटघरे में लाए, या फिर इज़राइल ऐसा करेगा।”
क्या पाकिस्तान इज़राइली हमले से डरता है?
वहीं, इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि “पाकिस्तान किसी भी बाहरी खतरे से खुद को बचाने में सक्षम है।” जिससे पता चलता है कि पाकिस्तान इज़राइली हमले की आशंका से डरा हुआ है। जब पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफ़क़त अली खान से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान इस बात से चिंतित है कि इज़राइल कतर पर हमले की तरह अपने सैन्य अभियानों का विस्तार कैसे कर रहा है? तो उन्होंने जवाब दिया कि “हम मध्य पूर्व और अपने आस-पास के इलाकों में हो रही घटनाओं पर कड़ी नज़र रख रहे हैं। लेकिन मैं यह स्पष्ट कर दूँ कि पाकिस्तान किसी भी बाहरी खतरे से खुद को बचाने में पूरी तरह सक्षम है।”
इसके अलावा, उन्होंने इज़राइल को परमाणु बम की धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता का समर्थक है। लेकिन पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति किसी भी दुस्साहस या खतरे का कड़ा जवाब दिया जाएगा।”
