शनि की साढ़े साती से बचने का अचूक उपाय! करें सुंदरकांड की चौपाई का पाठ और पाएँ सुख-शांति, वीडियो में देखे पूरी डिटेल

4 Min Read

सनातन धर्म में रामचरितमानस का विशेष महत्व माना जाता है और रामचरितमानस के सुंदरकांड में बजरंगबली हनुमान जी महाराज की महिमा का वर्णन किया गया है। सुंदरकांड को बहुत ही शुभ और शक्तिशाली भी माना जाता है। सुंदरकांड भगवान राम की कथा का वह अंश है जिसमें हनुमान जी महाराज के पराक्रम, शक्ति और बुद्धि का अद्भुत वर्णन देखने को मिलता है। सुंदरकांड का नियमित पाठ करने से जीवन में कई लाभ भी मिलते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या का प्रभाव भी कम हो जाता है। सुंदरकांड में कई ऐसी शक्तिशाली चौपाइयों और दोहों का उल्लेख किया गया है, जिनका पालन करने से व्यक्ति को सभी मनोकामनाओं की सिद्धि भी प्राप्त होती है। तो आइए आज उन्हीं दोहों में से एक दोहे को विस्तार से समझते हैं। दरअसल, सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। इसी तरह मंगलवार और शनिवार हनुमान जी महाराज को समर्पित हैं। अगर आप इस दिन सुंदरकांड का पाठ करते हैं, तो ऐसा करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। रामचरितमानस के सुंदरकांड में कई चमत्कारी चौपाइयां हैं। सुंदरकांड की यह चौपाई बहुत शक्तिशाली है, अगर आप इसका रोजाना जाप करेंगे तो आपको लाभ मिलेगा। सुंदरकांड की यह चौपाई बहुत शक्तिशाली है, अगर आप इसका रोजाना जाप करेंगे तो आपको लाभ मिलेगा।

चौपाइयों का क्या अर्थ है?

जिनमें से एक “बन बाग उपबन बाटिका सर कूप बापीं सोहहीं।
नर नाग सुर गंधर्ब कन्या रूप मुनि मन मोहहीं।।
कहुँ माल देह बिसाल सैल समान अतिबल गर्जहीं।
नाना अखारेन्ह भिरहिं बहु बिधि एक एकन्ह तर्जहीं।” सुंदरकांड के इस चौपाई में लंका की सुंदरता और राक्षस जाति के शक्ति का वर्णन किया गया है जिसके बारे में विस्तार से शशिकांत दास बताते हैं..

बन बाग उपबन बाटिका सर कूप बापीं सोहहीं।
अर्थात
लंका में वन बाग उपवन और बगीचा तथा सरोवर कुआं बहुत ही सुंदर है

नर नाग सुर गंधर्ब कन्या रूप मुनि मन मोहहीं।।
अर्थात
लंका के निवासियों के रूप में मनुष्य, नाग देवता और गंधर्व की कन्याएं थीं जो मुनियों के मन को भी मोहित कर लेती थीं.

कहुँ माल देह बिसाल सैल समान अतिबल गर्जहीं।
अर्थात
लंका में कुछ राक्षस जाति ऐसे भी हैं जिनके शरीर बहुत विशाल है जो पहाड़ों के समान है.

नाना अखारेन्ह भिरहिं बहु बिधि एक एकन्ह तर्जहीं।
अर्थात
वह सभी लोग विभिन्न अखाड़ों में लड़ते थे और एक-दूसरे को भी चुनौती देते थे

शशिकांत दास बताते हैं कि इस कलयुग में हनुमान जी महाराज एक ऐसे देवता हैं जो जागृत रूप में विद्यमान हैं और उनका नाम लेने मात्र से ही सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। ऐसे में यदि प्रतिदिन रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाए, उसके दोहे और चौपाई का कार्यक्रम किया जाए, तो हनुमान जी महाराज की शक्ति प्राप्त होती है। साथ ही शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है।

Share This Article