भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हाइड्रोजन बम वाले बयान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा, “जब भी मैं राहुल गांधी को सुनता हूँ, तो उनकी बातें समझने के लिए मुझे कई तरह के एंटेना खोलने पड़ते हैं। आज उन्होंने कहा कि उन्होंने एटम बम फोड़ दिया है, अब हाइड्रोजन बम फोड़ेंगे। उनका कर्नाटक एटम बम धराशायी हो गया है, वो कोई मामूली दिवाली का पटाखा भी नहीं था। एक बार उन्होंने (राहुल गांधी) कहा था कि इंसान 5-6 साल में जवान हो जाता है। दूसरी बात उन्होंने कही थी कि तपस्या करने से गर्मी आती है। तो एटम बम और हाइड्रोजन बम का चुनाव से क्या संबंध है, इसके लिए मुझे जानकारी हासिल करनी होगी। राहुल गांधी खुद को इतना हल्का क्यों बना रहे हैं, आप विपक्ष के नेता के पद पर हैं, उसकी एक गरिमा होती है।”
‘क्या तेजस्वी दोयम दर्जे के खिलाड़ी हो गए हैं?’
उन्होंने आगे कहा, “याद कीजिए आपने मोहब्बत की दुकान ली थी, जिसमें आपने कितनी नफरत परोसी थी। जब आप गाड़ी में सफर करते हैं तो राहुल आगे होते हैं, तेजस्वी पीछे होते हैं और अखिलेश भी पीछे होते हैं। राहुल की यात्रा में मीसा जी नहीं दिखीं। तो क्या राहुल गांधी ने परिवार में मतभेद बढ़ा दिए हैं? क्या तेजस्वी बिहार में नंबर 2 खिलाड़ी बन गए हैं? यह देखने वाली बात है। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने दुष्प्रचार किया कि बीजेपी आएगी तो संविधान बदल जाएगा। इसका असर दो जगह हुआ, यूपी और महाराष्ट्र, लेकिन हमने चुनाव आयोग को कुछ नहीं कहा। उस समय चुनाव आयोग ठीक था। अब वे चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। देश की जनता जान गई है कि कांग्रेस और विपक्ष ने उन्हें धोखा दिया। इसके बाद हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली हर जगह हराने का काम किया, अब बिहार में भी हराएंगे।”
‘राहुल गांधी मतदान के अधिकार का अपमान कर रहे हैं’
रविशंकर प्रसाद ने कहा, “राहुल गांधी लोगों के मतदान के अधिकार का सुनियोजित तरीके से अपमान कर रहे हैं। राहुल गांधी के इस अहंकार को तोड़ना ज़रूरी है। अगर ईवीएम के बिना चुनाव होते, तो बिहार में बूथ लूट होती। चुनाव आयोग की बदौलत बूथ कैप्चरिंग बंद हो गई है। अब जब अखिलेश यादव या तेजस्वी यादव जैसे नेता बैलेट पेपर पर वापसी की मांग कर रहे हैं, तो यह उनकी हताशा ही दर्शाता है। वे ईवीएम और सर का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अब वे बूथ कैप्चरिंग नहीं कर सकते। वे चाहते हैं कि घुसपैठिए वोट डालें।”
राहुल गांधी से तीन सवाल
उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर कई सवाल उठाए हैं, लेकिन हलफनामे के मुद्दे पर वह चुप क्यों हैं? मैं तीन सवाल उठाना चाहता हूँ, जिनका जवाब राहुल गांधी को देना चाहिए। 21 लाख लोग मर चुके हैं। क्या उन्हें अब भी मतदाता सूची में होना चाहिए? 7 लाख लोगों के नाम दो जगहों पर हैं, क्या उन्हें वहाँ होना चाहिए? 35 लाख लोग अब अपने पंजीकृत पते पर नहीं रहते, क्या उनके नाम रहने चाहिए? चुनाव आयोग ने साफ़ कहा है कि आपत्तियाँ हलफनामे के ज़रिए दर्ज की जानी चाहिए। राहुल गांधी इससे क्यों भाग रहे हैं? क्योंकि उन्हें पता है कि हलफनामे में झूठ बोलने पर क़ानूनी कार्रवाई हो सकती है।”
‘बिहार जवाब देगा’
उन्होंने आगे कहा, “यह पहली बार नहीं है। राफेल से लेकर प्रधानमंत्री को ‘चौकीदार चोर’ कहने और यहाँ तक कि हमारी सेना से सबूत माँगने तक, बेबुनियाद आरोप लगाना राहुल गांधी की आदत रही है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सैनिकों के पराक्रम को न तो स्वीकार किया और न ही उसकी प्रशंसा की। इसके बजाय, वह हर चीज़ पर सवाल उठाते हैं। कोई भी संवैधानिक संस्था उनके हमलों से अछूती नहीं है। उनका मानना है कि जो भी वह सोचते हैं, वह सही होना चाहिए, चाहे तथ्य कुछ भी हों। लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि उनका समय पूरा हो चुका है। बिहार उन्हें जवाब देगा।”
‘माँ का सम्मान होना चाहिए’
रविशंकर प्रसाद ने कहा, “लोकतंत्र सार्वजनिक शालीनता से चलता है। कम से कम एक माँ का तो सम्मान होना चाहिए। मेरी टीम ने मुझे बताया है कि प्रधानमंत्री को 107 बार गालियाँ दी गई हैं। लेकिन क्या राहुल गांधी ने कभी इसकी निंदा की है? कम से कम अपनी माँ को तो राजनीति से दूर रखें। क्या राहुल गांधी ने कभी स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री की माँ को दी गई गालियाँ किसी कांग्रेसी कार्यकर्ता ने नहीं दी थीं और अगर दी भी गईं, तो क्या वह कार्रवाई करेंगे? यह चुप्पी उनके मन में व्याप्त गहरी नफ़रत को दर्शाती है, क्योंकि वह मानते हैं कि प्रधानमंत्री की कुर्सी उनका जन्मसिद्ध अधिकार है।”
