शाहजहाँपुर निवासी कुख्यात हिस्ट्रीशीटर और गैंगस्टर अभिषेक मौर्य उर्फ शेखर की हत्या का राज आखिरकार खुल ही गया। 50,000 रुपये के इनामी वकील शेखर, जिस पर हत्या के प्रयास, लूटपाट और गैंगस्टर एक्ट समेत 16 से ज़्यादा मामले दर्ज थे, की हत्या उसके भतीजे के दोस्त ने ही की थी। वजह बेहद चौंकाने वाली थी। आरोपी कुलदीप दुबे की महिला मित्र को मृतक अभिषेक लगातार परेशान करता था।
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इसी रंजिश में कुलदीप ने अपनी जान दे दी। पुलिस जाँच में पता चला है कि दिसंबर 2024 में शेखर कानपुर के कल्याणपुर में अपनी बहन सीमा के घर आया था। उसका भतीजा अभय कुशवाहा शेखर को अपने दोस्त कुलदीप के घर ले गया। शेखर कुछ दिन वहाँ रहा, लेकिन इस दौरान उसने कुलदीप की महिला मित्र के साथ छेड़छाड़ और दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसी बात से नाराज़ होकर कुलदीप ने 15 दिसंबर को अभिषेक की हत्या कर दी।
गैंगस्टर का बड़ा भाई भी साजिश में शामिल
हत्या के बाद कुलदीप ने अभय और उसके छोटे भाई युवराज को घटना की जानकारी दी। फिर तीनों ने मिलकर शव को बोरे में बंद करके अर्मापुर नहर में फेंक दिया। इस पूरी साजिश में अभिषेक का बड़ा भाई अजीत मौर्य भी शामिल था। 27 दिसंबर 2024 को पुलिस को नहर में एक अज्ञात शव मिला और उसका पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन शिनाख्त नहीं हो पाई।
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करीब आठ महीने बाद, अभिषेक की पत्नी शालू देवी ने इंटरनेट पर शव के बारे में खबर देखी। शालू ने अभिषेक के कपड़ों से शव की पहचान की, जिसके हाथ पर माँ और दिल का टैटू बना था। इसके बाद अर्मापुर पुलिस और एसटीएफ लखनऊ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों कुलदीप दुबे, अजीत मौर्य, अभय कुशवाहा और युवराज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
अपराध जगत में पहले से ही कुख्यात था शेखर
गौरतलब है कि अभिषेक मौर्य उर्फ शेखर अपराध जगत में पहले से ही कुख्यात था। 2 दिसंबर 2024 को शाहजहाँपुर में आयुष गुप्ता की हत्या के मामले में भी वह वांछित था। अपराध जगत में सक्रिय होने के कारण पुलिस ने उस पर 50 हज़ार रुपये का इनाम घोषित किया था।
पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया हत्या की मुख्य वजह आरोपी कुलदीप की महिला मित्र से छेड़छाड़ लग रही है। आठ महीने पुराने इस विवाद को टैटू और सोशल मीडिया की मदद से सुलझाया गया।
