शराब तस्करों की दबंगई! छापेमारी करने पहुंची टीम पर कर दिया हमला; होमगार्ड के जवान की मौत

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बिहार में शराबबंदी को लागू हुए कई साल हो चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि शराब तस्करों का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है। राज्य सरकार के सख्त कानून और पुलिस-उत्पाद विभाग की कार्रवाई के बावजूद शराब माफियाओं का हौसला कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है। शनिवार तड़के गोपालगंज जिले में शराब तस्करों की बेरहमी का ऐसा ही एक बड़ा उदाहरण सामने आया, जहां छापेमारी के दौरान तस्करों ने उत्पाद विभाग की टीम पर हमला कर दिया। इस हमले में होमगार्ड जवान अभिषेक कुमार शर्मा की मौत हो गई, जबकि उनका एक साथी जवान गंभीर रूप से घायल हो गया।

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तड़के हुई वारदात

जानकारी के अनुसार, घटना गोपालगंज जिले के विसम्भरपुर थाना क्षेत्र के सिपाया इंजीनियरिंग कॉलेज के पास हुई। शनिवार सुबह करीब 4 बजकर 30 मिनट पर उत्पाद विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश से शराब की एक बड़ी खेप गोपालगंज लाई जा रही है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम बलथरी चेक पोस्ट से छापेमारी के लिए रवाना हुई।उत्पाद विभाग में तैनात होमगार्ड जवान अभिषेक शर्मा अपने एक साथी जवान के साथ बाइक पर सिपाया इलाके की ओर पहुंचे। इसी दौरान उन्होंने एक संदिग्ध बाइक सवार को रोकने की कोशिश की।

तस्करों ने दी जानलेवा टक्कर

जैसे ही जवानों ने बाइक सवार को रोकने का प्रयास किया, तभी पीछे से तस्करों का दूसरा साथी तेज रफ्तार में आया और उसने जवानों की बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों जवान सड़क पर बुरी तरह गिर पड़े। इस हादसे में अभिषेक शर्मा के सिर में गंभीर चोट आई और उनका काफी खून बह गया।घायल हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं, दूसरे जवान का इलाज जारी है और उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

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उत्पाद अधीक्षक का बयान

इस पूरे मामले पर उत्पाद अधीक्षक अमृतेश कुमार ने बताया कि यह घटना शराब तस्करों का पीछा करने के दौरान हुई। जवान अभिषेक शर्मा ड्यूटी पर तैनात थे और सूचना के आधार पर कार्रवाई कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

लगातार बढ़ रहा तस्करों का हौसला

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब तस्करों के बढ़ते नेटवर्क ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी शराब माफियाओं ने सुरक्षा बलों पर हमला किया है।30 सितंबर को इसी जिले में शराब तस्करों ने होमगार्ड जवान बसंत मांझी को गोली मार दी थी। उस समय भी पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की थी, लेकिन अब एक बार फिर तस्करों ने सुरक्षा बल को निशाना बनाया है। इससे साफ जाहिर होता है कि माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं।

शराबबंदी पर सवाल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने शराबबंदी को एक “सामाजिक क्रांति” बताते हुए इसे लागू किया था। लेकिन पिछले कुछ सालों में लगातार सामने आ रहे मामले यह दर्शाते हैं कि शराब माफिया न केवल सक्रिय हैं, बल्कि वे खुलेआम पुलिस और सुरक्षा बलों को चुनौती देने से भी पीछे नहीं हट रहे।

  • शराबबंदी के नाम पर हर साल लाखों लीटर शराब जब्त की जाती है।

  • हजारों लोग गिरफ्तार भी किए जाते हैं।

  • इसके बावजूद शराब की अवैध तस्करी और बिक्री रुकने का नाम नहीं ले रही।

विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक शराब तस्करी के खिलाफ पुख्ता खुफिया नेटवर्क और सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस कानून का पूरी तरह सफल होना मुश्किल है।

जवान की शहादत से गमगीन परिवार

अभिषेक कुमार शर्मा की मौत की खबर से उनके परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और शोक है। गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग सरकार से यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक शराब माफिया इस तरह कानून-व्यवस्था को चुनौती देते रहेंगे।स्थानीय लोगों का कहना है कि जवानों को बिना पर्याप्त सुरक्षा साधनों के तस्करों के खिलाफ भेजा जाता है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं बार-बार घट रही हैं।

पुलिस की चुनौती

इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया है। एक तरफ शराबबंदी लागू रखने की चुनौती है, दूसरी तरफ सुरक्षा बलों की जान जोखिम में पड़ रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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