एक ऐसा मामला जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। एक भोली-सीधी पत्नी लक्ष्मी को उसका पति किशनदास रोज़-रोज़ ताने देता था—कभी रंग-रूप पर, कभी शरीर पर। उसे “काली-मोटी” कहकर नीचा दिखाना किशनदास की आदत बन गई थी। लेकिन 24 जून 2017 को उसने सारी हदें पार कर दीं और एक ऐसा कृत्य कर डाला, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
‘क्रीम’ के नाम पर मौत का जाल
किशनदास एक दिन घर पर एक क्रीम जैसा पदार्थ लाया और लक्ष्मी से कहा कि इसे लगाने से उसका रंग गोरा हो जाएगा। भोली-भाली लक्ष्मी ने बिना शक किए उस पदार्थ को अपने चेहरे और शरीर पर लगा लिया। लेकिन यह क्रीम नहीं बल्कि खतरनाक ज्वलनशील केमिकल था।
जैसे ही लक्ष्मी इसे पूरे शरीर पर लगा चुकी, किशनदास ने पास रखी सुलगती अगरबत्ती से उसे जला दिया। देखते ही देखते लक्ष्मी आग की लपटों में घिर गई। आरोप है कि इसके बाद किशनदास ने बचा हुआ केमिकल भी उस पर उड़ेल दिया, जिससे आग और भड़क उठी।
मौके पर हड़कंप, अस्पताल में मौत
लपटों में घिरी लक्ष्मी की चीख-पुकार सुनकर ससुराल वाले दौड़े और किसी तरह आग बुझाई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वह 90% से ज्यादा झुलस चुकी थी और इलाज के दौरान दम तोड़ बैठी। घटना के बाद किशनदास मौके से फरार हो गया।
कोर्ट का सख्त रुख
मामला अदालत तक पहुंचा और लंबी सुनवाई के बाद मावली अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने शुक्रवार, 30 अगस्त को फैसला सुनाया। अदालत ने कहा—“अभियुक्त ने न केवल अपनी पत्नी, बल्कि पूरी मानवता के खिलाफ जघन्य अपराध किया है।” अदालत ने आरोपी किशनलाल उर्फ किशनदास को फांसी की सजा, 50 हजार रुपये का जुर्माना और एक साल का कठोर कारावास सुनाया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि आरोपी को “गर्दन से तब तक लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।”
समाज के लिए संदेश
यह फैसला घरेलू हिंसा और स्त्री के अपमान के खिलाफ न्यायपालिका के कड़े रुख का उदाहरण है। अदालत ने साफ कर दिया कि औरत को उसके रंग-रूप या शरीर के आधार पर अपमानित करना और उस पर अत्याचार करना केवल अपराध ही नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ पाप है।
