आज से करीब 17 साल पहले, 16 मई 2008 की सुबह, दिल्ली से सटे नोएडा में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। एक जाने-माने डेंटिस्ट दंपति डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार की 14 वर्षीय बेटी आरुषि तलवार अपने कमरे में मृत पाई गई। शुरुआती जांच में घर के घरेलू सहायक हेमराज बंजाड़े को मुख्य संदिग्ध माना गया, लेकिन 24 घंटे बाद ही हेमराज का शव भी उसी घर की छत पर मिला। इस डबल मर्डर केस ने न सिर्फ पूरे देश को हिला दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरीं। 17 साल बीत जाने के बाद भी यह मामला कई अनुत्तरित सवालों के साथ एक पहेली बना हुआ है।
शुरुआती संदिग्ध से लेकर अनसुलझी कहानी तक
जब आरुषि का शव मिला, तो तलवार दंपति ने पुलिस को सूचित करने के बजाय अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को फोन किया। घंटों बाद, पुलिस मौके पर पहुंची तो उन्हें बताया गया कि हेमराज हत्या करके फरार हो गया है। नोएडा पुलिस ने हेमराज को पकड़ने के लिए टीमें नेपाल भेज दीं, लेकिन अगले ही दिन घर की छत पर हेमराज का शव मिलने के बाद पूरी जांच की दिशा बदल गई।
अब सवाल यह था कि अगर हेमराज मर चुका है, तो आरुषि का हत्यारा कौन था? पुलिस का शक तलवार दंपति की ओर चला गया। 18 मई को पुलिस ने बताया कि हत्या सर्जिकल ब्लेड से की गई है, जो एक डेंटिस्ट के पास अक्सर होता है। 23 मई को राजेश तलवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
सीबीआई जांच और एक के बाद एक सवाल
1 जून 2008 को, यह हाई-प्रोफाइल केस सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने भी राजेश तलवार को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान कई सवाल उठे, जिनके जवाब आज तक पूरी तरह से नहीं मिल पाए हैं:
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माता-पिता ने पुलिस को तुरंत क्यों नहीं बुलाया? आरुषि का शव मिलने के बाद, तलवार दंपति ने तुरंत पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी? उन्होंने सबसे पहले अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को क्यों बुलाया? यह सवाल आज भी इस मामले का सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है।
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दरवाजे का रहस्य: सुबह जब नौकरानी भारती देवी ने घंटी बजाई, तो दरवाजा अंदर से बंद था। फिर नुपुर तलवार ने अंदर का दरवाजा खोला और चाबी नीचे फेंक दी, जिसके बाद भारती ने बाहर से दरवाजा खोला। अगर हेमराज भाग गया था, तो दरवाजा अंदर से बंद क्यों था?
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हेमराज को संदिग्ध क्यों माना गया? शुरुआत में पुलिस ने तलवार दंपति के कहने पर हेमराज को हत्यारा मान लिया था। जब हेमराज का शव मिला, तो पुलिस की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे। क्या पुलिस ने बिना जांच-पड़ताल के ही हेमराज को संदिग्ध मान लिया था?
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डबल मर्डर का मोड़: हेमराज की लाश मिलने के बाद यह केस डबल मर्डर में बदल गया। जिस व्यक्ति को हत्यारा समझा जा रहा था, वह भी पीड़ित निकला। अब सवाल था कि दोनों को किसने मारा?
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राउटर की कहानी: सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा कि घटना की रात घर का इंटरनेट राउटर चालू था और सुबह 12 बजे से 1 बजे के बीच चालू रहा। इस बात से यह सिद्ध होता है कि उस समय कोई न कोई इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन यह किसने किया?
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फिंगरप्रिंट और बोतल: जांच में शराब की बोतल पर कोई फिंगरप्रिंट नहीं मिले। यह भी एक रहस्य बना हुआ है कि अगर हेमराज को छत पर मारा गया तो उसके खून के निशान कमरे में क्यों नहीं मिले?
अदालत का फैसला और बरी होने की कहानी
सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में तलवार दंपति को दोषी ठहराया और इसी के आधार पर ट्रायल चला। 26 नवंबर 2013 को सीबीआई अदालत ने राजेश और नूपुर तलवार को दोनों हत्याओं का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इस फैसले के पीछे कुछ मुख्य आधार थे:
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कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और कोई बाहरी व्यक्ति घर में नहीं घुसा।
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राउटर से यह साबित होता है कि घटना की रात कोई जग रहा था।
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हेमराज का शव घर की छत पर मिला, जिससे यह सिद्ध होता है कि हत्या अंदर ही की गई थी।
हालांकि, 12 अक्टूबर 2017 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलवार दंपति को बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि सीबीआई के पास ठोस सबूत नहीं थे और “अंतिम बार देखे जाने” (Last Seen Theory) का सिद्धांत तलवार दंपति पर लागू नहीं होता। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन परिस्थितियों के आधार पर सीबीआई कोर्ट ने सजा सुनाई थी, वे इतने पुख्ता नहीं थे कि उनसे संदेह से परे जाकर आरोप सिद्ध हो सकें।
आज भी अनसुलझी पहेली
आरुषि-हेमराज हत्याकांड आज भी एक अनसुलझी गुत्थी बनी हुई है। तलवार दंपति बरी हो चुके हैं, लेकिन असली गुनहगार कौन था, यह सवाल आज भी बरकरार है। यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली में एक मील का पत्थर बन चुका है, जो दिखाता है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य कभी-कभी पर्याप्त नहीं होते हैं। आरुषि और हेमराज को न्याय मिला या नहीं, यह सवाल आज भी लाखों लोगों के मन में है, जिसका जवाब शायद कभी नहीं मिल पाएगा।
