लोकतंत्र में क्यों खास है उपराष्ट्रपति चुनाव? जानये वोटिंग प्रोसेस से लेकर उम्मीदवारों की योग्यता तक

4 Min Read

नई दिल्ली। भारत के लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति का चुनाव केवल संवैधानिक प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों और विपक्ष-सत्ता की ताक़त की भी अहम परीक्षा माना जाता है। इस बार मुकाबला एनडीए की ओर से महाराष्ट्र के राज्यपाल राधाकृष्णन और विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए के उम्मीदवार, उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है।

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

21 जुलाई 2025 की रात उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद यह केवल तीसरी बार है जब किसी उपराष्ट्रपति ने कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ दिया हो।

उपराष्ट्रपति चुनाव का इतिहास

1952 से अब तक कुल 14 उपराष्ट्रपति चुने जा चुके हैं। धनखड़ से पहले वीवी गिरि और आर. वेंकटरमण ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए बीच कार्यकाल में इस्तीफ़ा दिया था। अब इतिहास में तीसरी बार देश उपराष्ट्रपति पद के लिए मध्यावधि चुनाव का गवाह बनेगा।

चुनाव प्रक्रिया कैसी होती है?

संविधान के अनुच्छेद 66 के मुताबिक:

  • उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्य मिलकर करते हैं।

  • चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) पद्धति से होता है।

  • सांसद अपनी पसंद के अनुसार उम्मीदवारों को प्राथमिकता क्रम (1, 2, 3…) में वोट देते हैं।

  • जीतने के लिए उम्मीदवार को बहुमत यानी (कुल वैध वोट ÷ 2) + 1 का कोटा हासिल करना होता है।

  • यदि पहले दौर में कोई उम्मीदवार कोटा नहीं पाता, तो सबसे कम वोट पाने वाले को हटा दिया जाता है और उसके वोट अगले विकल्प को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।

इस बार लोकसभा और राज्यसभा के कुल 782 सांसद मतदान करेंगे। जीत के लिए किसी उम्मीदवार को 391 वोटों की ज़रूरत होगी।

कौन मतदान करता है?

  • लोकसभा के सभी निर्वाचित सदस्य

  • राज्यसभा के निर्वाचित व मनोनीत सदस्य
    (राज्य विधानसभाओं के सदस्य इसमें शामिल नहीं होते।)

टाइमलाइन 2025

  • चुनाव अधिसूचना: 7 अगस्त

  • नामांकन की अंतिम तिथि: 21 अगस्त

  • जांच: 23 अगस्त

  • नाम वापसी: 26 अगस्त

  • मतदान व नतीजे: 9 सितंबर

जीत का गणित

  • वर्तमान में एनडीए के पास 422 सांसदों का समर्थन है।

  • विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए के पास लगभग 330 वोटों का समर्थन है।

  • ऐसे में एनडीए का पलड़ा इस चुनाव में भारी माना जा रहा है।

उपराष्ट्रपति बनने की योग्यता

  • भारत का नागरिक होना अनिवार्य

  • न्यूनतम 35 वर्ष आयु

  • राज्यसभा का सदस्य बनने के योग्य

  • कोई आपराधिक दोष सिद्ध न हो

  • नामांकन के लिए कम से कम 20 प्रस्तावक और 20 अनुमोदक ज़रूरी

उपराष्ट्रपति का कार्यकाल और भूमिका

  • कार्यकाल 5 साल का होता है।

  • राज्यसभा का सभापति उपराष्ट्रपति ही होता है।

  • राष्ट्रपति के अनुपस्थित होने या पद रिक्त होने पर उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाते हैं।

क्यों खास है उपराष्ट्रपति चुनाव?

यह चुनाव केवल संवैधानिक पद की पूर्ति भर नहीं है, बल्कि राजनीतिक ताकत का भी बड़ा प्रदर्शन होता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों के ज़रिए एक राजनीतिक संदेश जनता और सांसदों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।भारत की संसदीय व्यवस्था में उपराष्ट्रपति का चुनाव हमेशा से लोकतंत्र की परिपक्वता और राजनीतिक संतुलन की एक अहम कसौटी रहा है।

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});

Share This Article