राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर हलचल तेज़ हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि आगामी 7 से 10 दिनों के भीतर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी जाएगी। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी और बढ़ने वाली है।
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जानकारी के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग लगभग 11 हज़ार पंचायतों और 150 से अधिक शहरी निकायों में चुनाव करवाने की तैयारी कर रहा है। इनमें ग्राम पंचायतों से लेकर नगर परिषद, नगर पालिकाएं और नगर निगम शामिल होंगे। आयोग ने संबंधित जिलों और उपखंड स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं कि वे मतदान केंद्रों की सूची, मतदाता सूची और अन्य व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा कर लें।
गौरतलब है कि इन चुनावों को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी थी। विपक्षी दल लगातार राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग पर चुनाव में देरी का आरोप लगा रहे थे। वहीं, कई पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ा है। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आयोग सक्रिय हुआ है और तय समय में चुनाव करवाने की दिशा में काम कर रहा है।
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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ स्थानीय प्रतिनिधियों के चयन का मामला नहीं है, बल्कि राज्य की सियासत पर भी बड़ा असर डाल सकते हैं। पंचायत और निकाय चुनावों को अक्सर विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जाता है। इनमें जो भी दल अच्छा प्रदर्शन करता है, उसकी स्थिति अगले विधानसभा चुनावों में मजबूत होती है। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियाँ इस बार पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल है और लोग बदलाव चाहते हैं। ऐसे में पंचायत और निकाय चुनावों में भाजपा को बड़ा लाभ मिल सकता है। वहीं, कांग्रेस का दावा है कि उसकी सरकार ने गांवों और शहरों के विकास के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई हैं, जिनका असर सीधे मतदाताओं पर दिखेगा।
आयोग की तैयारी के अनुसार, चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसका सीधा असर पंचायत और शहरी निकायों के विकास कार्यों पर पड़ेगा, क्योंकि आचार संहिता लगते ही नए कामों की घोषणा और बजट स्वीकृति पर रोक लग जाएगी।
चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए आयोग को भारी संख्या में मतदान कर्मियों की नियुक्ति करनी होगी। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि कई जिलों में पहले चुनावों के दौरान हिंसा और गड़बड़ी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस बार आयोग ने साफ किया है कि हर स्तर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
कुल मिलाकर, राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों की घोषणा अब बस कुछ ही दिनों की बात है। जैसे ही तारीखों का ऐलान होगा, राजनीतिक दलों की रणनीतियाँ खुलकर सामने आने लगेंगी और प्रदेशभर में चुनावी माहौल देखने को मिलेगा।
