मिनिस्टर के बेटे और भाजपा विधायक में जुबानी जंग, वीडियो में जानें धनंजय बोले- क्यों लगा रखी है मंत्री पुत्र की रट

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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में चल रहा विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। एडहॉक कमेटी के कन्वीनर जयदीप बिहाणी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के बेटे धनंजय सिंह खींवसर ने पलटवार करते हुए बयान जारी किया है, जिसने पूरे मामले को और गरमा दिया है।

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धनंजय सिंह खींवसर ने बिहाणी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा,

“क्या किसी डॉक्टर के बेटे को डॉक्टर-पुत्र कहा जाता है? या किसी व्यापारी के बेटे को व्यापारी-पुत्र कहा जाता है? फिर मंत्री-पुत्र की रट क्यों लगा रखी है?”

उनके इस बयान से साफ है कि वे अपने ऊपर लगाए गए राजनीतिक प्रभाव से जुड़े आरोपों से नाराज़ हैं। खींवसर ने जोर देते हुए कहा कि वह RCA में अपनी काबिलियत और खेल के प्रति समर्पण के आधार पर काम कर रहे हैं, न कि अपने पारिवारिक बैकग्राउंड के कारण।

क्या है पूरा विवाद?

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में पिछले कुछ समय से एडहॉक कमेटी और वर्तमान नेतृत्व के बीच खींचतान चल रही है। कन्वीनर जयदीप बिहाणी ने हाल ही में प्रेस वार्ता के दौरान आरोप लगाया था कि RCA में राजनीतिक हस्तक्षेप और पारदर्शिता की कमी के चलते क्रिकेट गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उनका इशारा साफ तौर पर कुछ रसूखदार चेहरों की ओर था, जिनमें धनंजय सिंह खींवसर का नाम प्रमुखता से लिया गया।

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मंत्रीपुत्र होने का आरोप बेबुनियाद: खींवसर

धनंजय सिंह खींवसर ने इस बात को दोहराया कि RCA जैसे संस्थानों में लोगों को उनके काम और योगदान के आधार पर आंकना चाहिए, न कि उनके पारिवारिक नाम से।

“मैंने खेल की सेवा की है और क्रिकेट के विकास के लिए काम किया है। मेरी पहचान मेरे कार्यों से होनी चाहिए, न कि किसी पद से,” उन्होंने कहा।

RCA में अस्थिरता का असर खिलाड़ियों पर

RCA में जारी इस अंदरूनी विवाद का सबसे बड़ा खामियाजा राज्य के उभरते क्रिकेट खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। चयन प्रक्रिया, अभ्यास शिविर और टूर्नामेंट्स पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव देखा जा रहा है। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ में भी इस अस्थिरता को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

खेल से ऊपर राजनीति?

विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या खेल संघों में राजनीतिक दखल सही है? विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक प्रशासनिक निर्णय पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं होंगे, तब तक राज्य स्तर पर खेलों की गुणवत्ता और खिलाड़ियों का मनोबल प्रभावित होता रहेगा।

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