ईरान की मिलिट्री पावर मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ी है, खासकर मिसाइलों और ड्रोन के मामले में। यूनाइटेड स्टेट्स के साथ बढ़ते तनाव के बीच, ईरान के हथियार अमेरिकी नौसेना के जहाजों, जैसे कि USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। ईरान के पास मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा मिसाइल जखीरा है, जिसमें 3,000 से ज़्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं।
1. फतेह-1/2 हाइपरसोनिक मिसाइलें
फतेह-1 और फतेह-2 ईरान की सबसे एडवांस्ड मिसाइलें हैं, जिन्हें “कैरियर किलर” कहा जाता है। ये 16,000 से 18,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ती हैं और इनकी रेंज 1,400 किलोमीटर है। ये मिसाइलें बीच हवा में दिशा बदल सकती हैं, जिससे अमेरिकी डिफेंस सिस्टम (जैसे एजिस या SM-6) के लिए इन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। इन्हें अमेरिकी कैरियर या डिस्ट्रॉयर पर तेजी से हमला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
2. खलीज-ए फार्स / होर्मुज-2 एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें
ये मिसाइलें फतेह-110 पर आधारित हैं और इनकी रेंज 300 किलोमीटर है। इनकी स्पीड 3,704 से 6,174 किमी/घंटा तक होती है। 650 किलोग्राम के वॉरहेड से लैस, इन मिसाइलों को जहाजों को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इनकी सुपरसोनिक स्पीड के कारण इन्हें रोकना मुश्किल होता है। ये होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी जहाजों के लिए सीधा खतरा हैं।
3. बैलिस्टिक मिसाइलें जैसे सेज्जिल, खोर्रमशहर-4, शाहब-3
ईरान के पास 2,000 से 3,000 किलोमीटर की रेंज वाली हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जैसे सेज्जिल (2,000 किमी) और खोर्रमशहर। इनका इस्तेमाल अमेरिकी ठिकानों, जहाजों, या सहयोगी देशों (जैसे इज़राइल) पर एक साथ हमले (सैचुरेशन अटैक) करने के लिए किया जा सकता है, जिससे डिफेंस सिस्टम पर भारी दबाव पड़ सकता है।
4. क्रूज मिसाइलें जैसे कादर, घादर, अबू महदी
ये एंटी-शिप और लैंड-अटैक मिसाइलें हैं जिनकी रेंज 1000 किलोमीटर से ज़्यादा है। ये जमीन के करीब उड़ती हैं, जिससे रडार द्वारा इनका पता लगाना मुश्किल होता है। झुंड में इस्तेमाल किए जाने पर, ये अमेरिकी जहाजों के डिफेंस को चुनौती दे सकती हैं और फारस की खाड़ी में शिपिंग को बाधित कर सकती हैं।
5. शाहेद ड्रोन/UAV जैसे शाहेद-136/139
ईरान के पास लंबी दूरी की क्षमता वाले हज़ारों सस्ते सुसाइड ड्रोन हैं। हाल ही में इनका इस्तेमाल USS लिंकन के पास किया गया था। झुंड में हमला करके, वे पैट्रियट या CIWS सिस्टम को नाकाम कर सकते हैं, जिससे मिसाइलों के लिए रास्ता साफ हो जाता है।
इससे अमेरिकी नौसेना के सामने क्या चुनौती है?
ईरान की मुख्य रणनीति A2/AD (एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल) है – यानी होर्मुज जलडमरूमध्य (दुनिया के 20% तेल का रास्ता) को संभावित रूप से बंद करके अमेरिकी कैरियर ग्रुप के ऑपरेशन को महंगा और जोखिम भरा बनाना।
झुंड में हमले (ड्रोन + मिसाइल एक साथ) अमेरिकी सुरक्षा प्रणालियों पर ज़्यादा बोझ डाल सकते हैं। हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकना मुश्किल है, लेकिन अमेरिका के पास F-35C, SM-3 और एडवांस्ड सिस्टम हैं, जिससे किसी कैरियर को पूरी तरह से डुबोना मुश्किल हो जाता है।
मुख्य खतरा: आर्थिक नुकसान (बढ़ती तेल कीमतें), जान-माल का नुकसान, और संघर्ष का बढ़ना। ईरान की IRGC नेवी की तेज़ नावें, माइंस और मिनी-पनडुब्बियां (ग़दीर) भी जहाजों को परेशान कर सकती हैं। ईरान की ये क्षमताएं अमेरिका को अलर्ट पर रखती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सीधे टकराव में अमेरिकी टेक्नोलॉजी बेहतर है। फिर भी, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है।
