ओडिशा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि लापरवाही और ढिलाई अपराधियों को कैसे मौके का फायदा उठाने का रास्ता दे देती है। मामला गजपति जिले का है, जहां जुएल सबर नामक एक कुख्यात गांजा तस्कर पुलिस की हिरासत से फरार हो गया। हैरानी की बात यह है कि वह फरारी के वक्त पैर में बेड़ियां पहने था, और पुलिस टीम भी उसके साथ होटल में ही मौजूद थी।
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क्या है पूरा मामला?
जुएल सबर को महाराष्ट्र की अकोला पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर गांजा तस्करी और संगठित अपराध के गंभीर आरोप थे। गिरफ्तार करने के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया और फिर उसे रिमांड पर लेकर अकोला पुलिस आगे की जांच के लिए ओडिशा के गजपति जिले के मोहना इलाके में पहुंची। वहां पुलिस को कुछ अहम सुराग मिलने की उम्मीद थी, इसलिए उन्होंने 2 नवंबर की रात को मोहना इलाके के पदमालय लॉज में कमरा लेकर विश्राम करने का निर्णय लिया।
रात करीब 2 बजे पुलिस टीम होटल पहुंची और थकान के चलते सबने आराम करने का निर्णय लिया। आरोपी जुएल को भी उसी कमरे में रखा गया और पैरों में कड़ी लगा दी गई। पुलिस को लगा कि इतनी सुरक्षा पर्याप्त होगी, लेकिन सुबह होते ही सारी सावधानियां धरी की धरी रह गईं।
कैसे हुई फरारी?
जब सुबह हुई, पुलिसकर्मी फ्रेश होने में व्यस्त थे। इसी बीच जुएल ने मौका ताड़ा और अपनी चालाकी से दरवाजा खोलकर होटल से बाहर निकल गया। CCTV फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि उसने धीरे-धीरे होटल के गलियारे में चलते हुए बार-बार पीछे मुड़कर देखा, यह जांचने के लिए कि कहीं कोई पुलिसकर्मी तो नहीं देख रहा। लेकिन पुलिसकर्मी या तो दूसरे कमरे में सो रहे थे या AC की ठंडी हवा का मजा ले रहे थे।
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जुएल की चालाकी इतनी थी कि पैरों में कड़ी होने के बावजूद उसने खुद को बहुत सामान्य दिखाने की कोशिश की और बिना किसी रुकावट के होटल से बाहर निकलने में सफल रहा। खास बात यह रही कि सुबह का वक्त होने के कारण होटल के आसपास ज्यादा चहल-पहल नहीं थी, जिससे उसे फरार होने में कोई खास मुश्किल नहीं आई।
स्थानीय पुलिस को नहीं दी गई थी सूचना
इस मामले में अकोला पुलिस की बड़ी चूक यह रही कि उन्होंने गजपति जिले की स्थानीय पुलिस को इस ऑपरेशन के बारे में पहले से सूचना नहीं दी थी। यदि स्थानीय पुलिस को जानकारी दी गई होती तो शायद अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था हो सकती थी और आरोपी को भागने का मौका नहीं मिलता। लेकिन अकोला पुलिस बिना किसी पूर्व जानकारी के, आरोपी को लेकर होटल में ठहर गई और वही उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई।
पुलिस की शर्मनाक लापरवाही
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गंभीर अपराधी, जो पहले से ही पुलिस की निगरानी में था, कैसे पैरों में बेड़ियां होते हुए भी पुलिस टीम की मौजूदगी में फरार हो सकता है? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। CCTV फुटेज में पुलिस की लापरवाही साफ नजर आ रही है।
पुलिस ने आरोपी को होटल के कमरे में रखा, उसके साथ ही रुके, लेकिन उसे अकेला छोड़ देना, और किसी भी तरह का सुरक्षा घेरा ना लगाना, सीधे तौर पर लापरवाही की श्रेणी में आता है।
क्या कहती है पुलिस?
फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई है। गजपति और आसपास के जिलों में छापेमारी की जा रही है, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। इस मामले में पुलिस विभाग ने आंतरिक जांच के आदेश भी दिए हैं, ताकि यह पता चल सके कि किन अधिकारियों की गलती से यह चूक हुई।
निष्कर्ष: लापरवाही की बड़ी कीमत
यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि अपराधियों को पकड़ने के बाद असली जिम्मेदारी तब शुरू होती है, जब उन्हें कड़ी निगरानी में रखना होता है। एक अंतरराज्यीय तस्कर को इतनी ढीली सुरक्षा में रखना, वो भी गौरवशाली पुलिस टीम के होते हुए, न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि बेहद शर्मनाक भी है।अब देखना यह होगा कि ओडिशा और महाराष्ट्र पुलिस मिलकर जुएल को कितनी जल्दी पकड़ पाती है और क्या इस लापरवाही के लिए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।इस घटना ने यह साबित कर दिया कि यदि सुरक्षा में थोड़ी सी भी चूक हो जाए, तो अपराधी उसे मौका बनाकर कानून के शिकंजे से आसानी से निकल सकते हैं।
