राजधानी जयपुर के दो प्रतिष्ठित स्कूलों – द पैलेस स्कूल और एसएमएस स्कूल – को देर रात बम धमकी भरे ईमेल के जरिए उड़ाने की धमकी दी गई। बुधवार सुबह जैसे ही स्कूल प्रशासन को यह ईमेल मिला, उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई।
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सूचना मिलते ही जयपुर पुलिस, आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) और दमकल विभाग की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। सुरक्षा कारणों से स्कूल परिसर को पूरी तरह खाली कराया गया। प्रशासन ने छात्रों, शिक्षकों और अन्य स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला। स्कूल के आसपास के इलाके में भी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।
स्कूल परिसर में डॉग स्क्वाड और बम डिस्पोजल टीम ने चप्पे-चप्पे की तलाशी ली। इस दौरान सभी कक्षाओं, खेल के मैदान, पार्किंग और अन्य स्थानों को पूरी तरह से जांचा गया। घंटों की कड़ी मशक्कत और निरीक्षण के बाद भी किसी भी संदिग्ध वस्तु या बम का पता नहीं चला। अधिकारियों ने कहा कि यह एक फर्जी धमकी प्रतीत होती है, लेकिन सुरक्षा मानकों के अनुसार पूरी जांच की गई।
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पुलिस ने बताया कि फिलहाल धमकी देने वाले स्रोत का पता लगाने के लिए जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में ईमेल के भेजने वाले स्थान और आईपी एड्रेस की जानकारी जुटाई जा रही है। यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि क्या इसके पीछे कोई आपराधिक या आतंकवादी उद्देश्य था।
स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों और छात्रों को इस घटना की जानकारी दी और उन्हें आश्वस्त किया कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। दोनों स्कूलों में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए अधिकारियों ने न केवल प्रवेश द्वार पर चेकिंग बढ़ाई, बल्कि परिसर में निगरानी कैमरों की संख्या भी बढ़ा दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में शैक्षणिक संस्थानों को धमकी भरे ईमेल और साइबर माध्यमों से खतरा बढ़ा है। ऐसे मामलों में प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई किसी भी अप्रिय घटना को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस घटना से माता-पिता और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। उन्होंने अधिकारियों से सुरक्षा बढ़ाने और स्कूलों में सतर्कता बरतने की अपील की है। जयपुर पुलिस ने नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी संदिग्ध ईमेल, पैकेज या गतिविधि की तुरंत सूचना दें और अफवाहों पर भरोसा न करें।
राज्य में इस प्रकार की धमकियों की घटनाएं शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा उपायों को और सख्त करने का संकेत देती हैं। सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया और स्कूल प्रशासन की सतर्कता ने किसी भी बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई।
