कैंसर को लेकर बड़ा सवाल: क्या मां-बाप से बच्चों में ट्रांसफर हो सकती है ये घातक बिमारी ? जाने क्या कहते है डॉक्टर्स

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कैंसर शब्द सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है। यह चिंता तब और बढ़ जाती है, खासकर जब बात बच्चों की हो। माता-पिता अक्सर सोचते हैं कि क्या कैंसर किसी इंफेक्शन की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, या क्या यह बीमारी जन्म से ही बच्चों में फैल सकती है। जबकि AIDS जैसी गंभीर बीमारियों में इंफेक्शन का फैलना आम है, क्या कैंसर के साथ भी ऐसा ही है? इस सवाल को लेकर कई गलतफहमियां और डर हैं। तो, आइए जानते हैं कि क्या कैंसर AIDS की तरह बच्चों में फैल सकता है और इस बारे में एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं।

क्या कैंसर एक छूत की बीमारी है?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, कैंसर किसी भी तरह से छूत की बीमारी नहीं है। इसका मतलब है कि यह छूने से, साथ रहने से, खाना शेयर करने से या हवा से नहीं फैलता है। कैंसर तब होता है जब शरीर की कोशिकाओं के DNA में बदलाव होते हैं, जिससे वे बेकाबू होकर बढ़ने लगती हैं। यह प्रक्रिया शरीर के अंदर होती है और इसका दूसरे व्यक्ति के संपर्क से कोई लेना-देना नहीं है। यही वजह है कि कैंसर को फ्लू या दूसरे इंफेक्शन की तरह छूत की बीमारी नहीं माना जाता है।

कैंसर को AIDS से क्यों जोड़ा जाता है?

AIDS, या HIV, सीधे तौर पर कैंसर नहीं है, लेकिन यह शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। जब शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, तो वह असामान्य कोशिकाओं से प्रभावी ढंग से लड़ नहीं पाता है। इसलिए, HIV या AIDS वाले बच्चों में कुछ खास तरह के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें सबसे आम नॉन-हॉजकिन लिंफोमा है। इसे AIDS से जुड़ा लिंफोमा भी कहा जाता है। यह कैंसर लिम्फेटिक सिस्टम की सफेद रक्त कोशिकाओं में शुरू होता है।

बच्चों में AIDS से जुड़ा लिंफोमा कैसे होता है?

यह बीमारी आमतौर पर उन बच्चों में देखी जाती है जिन्हें जन्म के समय या स्तनपान के दौरान HIV इंफेक्शन होता है और उन्हें समय पर एंटीवायरल दवा नहीं मिलती है। HIV वायरस शरीर के इम्यून सिस्टम पर हमला करता है, जिससे इंफेक्शन और कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। HIV वाले बच्चों में उनके लिम्फ नोड्स, दिमाग, रीढ़ की हड्डी या शरीर के दूसरे हिस्सों में तेजी से बढ़ने वाले कैंसर हो सकते हैं।

एक्सपर्ट्स क्या सलाह देते हैं?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि समाज में कैंसर को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना बहुत ज़रूरी है। कैंसर के मरीजों से दूरी बनाना न सिर्फ गलत है, बल्कि यह उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। बच्चों के मामले में, अगर HIV या किसी दूसरी गंभीर बीमारी का खतरा है, तो समय पर जांच और सही इलाज बहुत ज़रूरी है।

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